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शान्ति पर्व
अध्याय १५
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वैशम्पाय़न उवाच
दण्डे स्थिताः प्रजाः सर्वा भय़ं दण्डं विदुर्वुधाः |  ४३   क
दण्डे स्वर्गो मनुष्याणां लोकोऽय़ं च प्रतिष्ठितः ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति