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शान्ति पर्व
अध्याय १२८
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भीष्म उवाच
राज्ञः कोशवलं मूलं कोशमूलं पुनर्वलम् |  ३५   क
तन्मूलं सर्वधर्माणां धर्ममूलाः पुनः प्रजाः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति