शान्ति पर्व  अध्याय १२८

भीष्म उवाच

उपमामत्र वक्ष्यामि धर्मतत्त्वप्रकाशिनीम् |  ४०   क
यूपं छिन्दन्ति यज्ञार्थं तत्र ये परिपन्थिनः ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति