अनुशासन पर्व  अध्याय १२८

महेश्वर उवाच

सुरभीं ससृजे व्रह्मामृतधेनुं पय़ोमुचम् |  १०   क
सा सृष्टा वहुधा जाता क्षरमाणा पय़ोऽमृतम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति