अनुशासन पर्व  अध्याय १२८

उमो उवाच

निवासा वहुरूपास्ते विश्वरूपगुणान्विताः |  १३   क
तांश्च सन्त्यज्य भगवञ्श्मशाने रमसे कथम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति