अनुशासन पर्व  अध्याय १२८

उमो उवाच

धर्मः किंलक्षणः प्रोक्तः कथं वाचरितुं नरैः |  २३   क
शक्यो धर्ममविन्दद्भिर्धर्मज्ञ वद मे प्रभो ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति