सौप्तिक पर्व  अध्याय १६

वैशम्पाय़न उवाच

तामुपेत्य निरानन्दां दुःखशोकसमन्विताम् |  २४   क
परिवार्य व्यतिष्ठन्त पाण्डवाः सहकेशवाः ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति