भीष्म पर्व  अध्याय ३५

श्रीभगवानु उवाच

ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना |  २४   क
अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मय़ोगेन चापरे ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति