उद्योग पर्व  अध्याय १२८

वैशम्पाय़न उवाच

स प्रविश्य सभां वीरः सिंहो गिरिगुहामिव |  १२   क
आचष्ट तमभिप्राय़ं केशवाय़ महात्मने ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति