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वन पर्व
अध्याय १९८
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व्याध उवाच
यथादित्यः समुद्यन्वै तमः सर्वं व्यपोहति |  ५३   क
एवं कल्याणमातिष्ठन्सर्वपापैः प्रमुच्यते ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति