आदि पर्व  अध्याय १७०

गन्धर्व उवाच

चक्षूंषि प्रतिलभ्याथ प्रतिजग्मुस्ततो नृपाः |  ९   क
भार्गवस्तु मुनिर्मेने सर्वलोकपराभवम् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति