उद्योग पर्व  अध्याय १२८

वैशम्पाय़न उवाच

दुर्ग्रहः पाणिना वाय़ुर्दुःस्पर्शः पाणिना शशी |  ३९   क
दुर्धरा पृथिवी मूर्ध्ना दुर्ग्रहः केशवो वलात् ||  ३९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति