उद्योग पर्व  अध्याय १२८

वैशम्पाय़न उवाच

पुराय़मस्मान्गृह्णाति क्षिप्रकारी जनार्दनः |  ४   क
सहितो धृतराष्ट्रेण राज्ञा शान्तनवेन च ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति