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उद्योग पर्व
अध्याय १२८
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वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धश्च वक्रश्च शिशुपालश्च वीर्यवान् |  ४७   क
वाणश्च निहतः सङ्ख्ये राजानश्च निषूदिताः ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति