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वन पर्व
अध्याय १५२
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वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा राक्षसान्सर्वान्भीमसेनो व्यगाहत |  १२   क
ततः स राक्षसैर्वाचा प्रतिषिद्धः प्रतापवान् |  १२   ख
मा मैवमिति सक्रोधैर्भर्त्सय़द्भिः समन्ततः ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति