शान्ति पर्व  अध्याय १२९

भीष्म उवाच

अनुरक्तेन पुष्टेन हृष्टेन जगतीपते |  ११   क
अल्पेनापि हि सैन्येन महीं जय़ति पार्थिवः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति