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उद्योग पर्व
अध्याय ११३
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नारद उवाच
नातः परं वैनतेय़ किञ्चित्पापिष्ठमुच्यते |  ९   क
यथाशानाशनं लोके देहि नास्तीति वा वचः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति