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अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
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महेश्वर उवाच
एकेनांशेन धर्मार्थश्चर्तव्यो भूतिमिच्छता |  १९   क
एकेनांशेन कामार्थ एकमंशं विवर्धय़ेत् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति