अनुशासन पर्व  अध्याय १२९

महेश्वर उवाच

निवृत्तिलक्षणस्त्वन्यो धर्मो मोक्ष इति स्मृतः |  २०   क
तस्य वृत्तिं प्रवक्ष्यामि शृणु मे देवि तत्त्वतः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति