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अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
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महेश्वर उवाच
हन्त तेऽहं प्रवक्ष्यामि मुनिधर्ममनुत्तमम् |  ३५   क
यं कृत्वा मुनय़ो यान्ति सिद्धिं स्वतपसा शुभे ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति