अनुशासन पर्व  अध्याय ३२

नारद उवाच

प्रसन्नहृदय़ाश्चैव सर्वसत्त्वेषु नित्यशः |  १४   क
आ पृष्ठतापात्स्वाध्याय़े युक्तास्तान्पूजय़ाम्यहम् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति