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अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
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महेश्वर उवाच
अतिथिं काङ्क्षमाणो वै शेषान्नकृतभोजनः |  ५४   क
सत्यधर्मरतिः क्षान्तो मुनिधर्मेण युज्यते ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति