सभा पर्व  अध्याय १९

वैशम्पाय़न उवाच

एवं विरागवसना वहिर्माल्यानुलेपनाः |  ४०   क
सत्यं वदत के यूय़ं सत्यं राजसु शोभते ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति