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द्रोण पर्व
अध्याय ६
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सञ्जय़ उवाच
वहूनीह विकुर्वाणो दिव्यान्यस्त्राणि संय़ुगे |  ३५   क
अपीडय़त्क्षणेनैव द्रोणः पाण्डवसृञ्जय़ान् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति