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विराट पर्व
अध्याय ४
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धौम्य उवाच
विदिते चास्य कुर्वीत कार्याणि सुलघून्यपि |  १५   क
एवं विचरतो राज्ञो न क्षतिर्जाय़ते क्वचित् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति