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विराट पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
जघन्यतो वय़ं तत्र यास्यामो दिवसान्तरम् |  २४   क
विषय़ं मत्स्यराजस्य सुसमृद्धं सुसंहताः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति