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द्रोण पर्व
अध्याय १२९
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सञ्जय़ उवाच
तस्यां रजन्यां घोराय़ां नदन्त्यः सर्वतः शिवाः |  १४   क
न्यवेदय़न्भय़ं घोरं सज्वालकवलैर्मुखैः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति