शान्ति पर्व  अध्याय ८४

भीष्म उवाच

अत्याढ्यांश्चातिशूरांश्च व्राह्मणांश्च वहुश्रुतान् |  २   क
सुसन्तुष्टांश्च कौन्तेय़ महोत्साहांश्च कर्मसु ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति