आदि पर्व  अध्याय १३

शौनक उवाच

आस्तीकश्च द्विजश्रेष्ठः किमर्थं जपतां वरः |  २   क
मोक्षय़ामास भुजगान्दीप्तात्तस्माद्धुताशनात् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति