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अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
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भीष्म उवाच
यत्किञ्चित्कथ्यते लोके श्रूय़ते पश्यतेऽपि वा |  १८   क
सर्वं तद्व्राह्मणेष्वेव गूढोऽग्निरिव दारुषु ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति