आश्रमवासिक पर्व  अध्याय १३

वैशम्पाय़न उवाच

तानविव्रुवतः किञ्चिद्दुःखशोकपराय़णान् |  २२   क
पुनरेव महातेजा धृतराष्ट्रोऽव्रवीदिदम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति