सभा पर्व  अध्याय १३

श्रीकृष्ण उवाच

जामदग्न्येन रामेण क्षत्रं यदवशेषितम् |  २   क
तस्मादवरजं लोके यदिदं क्षत्रसञ्ज्ञितम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति