विराट पर्व  अध्याय ३५

उत्तर उवाच

वृहन्नडे गाय़नो वा नर्तनो वा पुनर्भव |  १६   क
क्षिप्रं मे रथमास्थाय़ निगृह्णीष्व हय़ोत्तमान् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति