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उद्योग पर्व
अध्याय २
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वलदेव उवाच
स दीव्यमानः प्रतिदेवनेन; अक्षेषु नित्यं सुपराङ्मुखेषु |  ११   क
संरम्भमाणो विजितः प्रसह्य; तत्रापराधः शकुनेर्न कश्चित् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति