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वन पर्व
अध्याय १३
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वैशम्पाय़न उवाच
तं चापि विनिहत्योग्रं भीमः प्रहरतां वरः |  १०१   क
सहितो भ्रातृभिः सर्वैर्द्रुपदस्य पुरं यय़ौ ||  १०१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति