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वन पर्व
अध्याय १३
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अर्जुन उवाच
प्रभासं चाप्यथासाद्य तीर्थं पुण्यजनोचितम् |  १४   क
तथा कृष्ण महातेजा दिव्यं वर्षसहस्रकम् |  १४   ख
आतिष्ठस्तप एकेन पादेन निय़मे स्थितः ||  १४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति