वन पर्व  अध्याय १३

वैशम्पाय़न उवाच

य एतानाक्षिपद्राष्ट्रात्सह मात्राविहिंसकान् |  ७१   क
अधीय़ानान्पुरा वालान्व्रतस्थान्मधुसूदन ||  ७१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति