विराट पर्व  अध्याय १३

द्रौपद्यु उवाच

अन्तर्महीं वा यदि वोर्ध्वमुत्पतेः; समुद्रपारं यदि वा प्रधावसि |  २०   क
तथापि तेषां न विमोक्षमर्हसि; प्रमाथिनो देवसुता हि मे वराः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति