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द्रोण पर्व
अध्याय १७०
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सञ्जय़ उवाच
ते दिशः खं च सैन्यं च समावृण्वन्महाहवे |  १७   क
मुहूर्ताद्भास्करस्येव राजँल्लोकं गभस्तय़ः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति