वन पर्व  अध्याय १४६

वैशम्पाय़न उवाच

कदलीवनमध्यस्थमथ पीने शिलातले |  ६४   क
स ददर्श महावाहुर्वानराधिपतिं स्थितम् ||  ६४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति