उद्योग पर्व  अध्याय ४१

धृतराष्ट्र उवाच

अनुक्तं यदि ते किञ्चिद्वाचा विदुर विद्यते |  १   क
तन्मे शुश्रूषवे व्रूहि विचित्राणि हि भाषसे ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति