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द्रोण पर्व
अध्याय ९८
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सञ्जय़ उवाच
संनिरुद्धं रणे द्रोणं पाञ्चाला वीक्ष्य मारिष |  ३०   क
आवव्रुः सर्वतो राजन्धर्मपुत्रजय़ैषिणः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति