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कर्ण पर्व
अध्याय १३
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सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनं स्वे परिवार्य सैनिकाः; पुरन्दरं देवगणा इवाव्रुवन् |  २३   क
अभैष्म यस्मान्मरणादिव प्रजाः; स वीर दिष्ट्या निहतस्त्वय़ा रिपुः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति