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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
एते चान्ये च वहवो गणाः शत्रुभय़ङ्कराः |  ४०   क
अनुजग्मुर्महात्मानं त्रिदशेन्द्रस्य संमते ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति