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शल्य पर्व
अध्याय १३
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सञ्जय़ उवाच
ततोऽर्जुनं द्वादशभी रुक्मपुङ्खैः सुतेजनैः |  २५   क
वासुदेवं च दशभिर्द्रौणिर्विव्याध भारत ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति