शान्ति पर्व  अध्याय १०७

भीष्म उवाच

स त्वं धर्ममवेक्षस्व त्यक्त्वाधर्ममसाम्प्रतम् |  १६   क
न हि कामान्न च द्रोहात्स्वधर्मं हातुमर्हसि ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति