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शान्ति पर्व
अध्याय १५९
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भीष्म उवाच
शोणितं यावतः पांसून्सङ्गृह्णीय़ाद्द्विजक्षतात् |  ४३   क
तावतीः स समा राजन्नरके परिवर्तते ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति