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अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
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महेश्वर उवाच
अष्टमीय़ज्ञपरता चातुर्मास्यनिषेवणम् |  १५   क
पौर्णमास्यां तु यो यज्ञो नित्ययज्ञस्तथैव च ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति