उद्योग पर्व  अध्याय १३२

विदुरो उवाच

महार्हमाल्याभरणां सुमृष्टाम्वरवाससम् |  १५   क
पुरा दृष्ट्वा सुहृद्वर्गो मामपश्यत्सुदुर्गताम् ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति