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अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
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उमो उवाच
नित्यं स्थानमुपागम्य दिव्यचन्दनरूषिताः |  ३६   क
केन वा कर्मणा देव भवन्ति वनगोचराः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति